Shayari|शायरी
जुनून नही है तेरी चाह पर
कर गुजरने की तम्मना का
वरना कोई काम नही
जो तेरी कदमो में पनाह न मांगे
न तो थी किसी को कद्र हमारी
न हमे थी किसी की कद्र
हम निकले थे शहर में बेकार की तरह
जब से तुम हमे मिली हो
हमे तुम्हारी कद्र है
तुम्हे हमारी कद्र हैं
तुम मिली हो मेरी जिंदगी प्यार की तरह
वाह क्या बात है
तेरी आँखों के पानी मे
जब ये बहती हैं
तो मेरी जवानी सींच देती हैं
हम काबुल करते है
की हम तेरे इश्क़ के कायल हैं
तुझे अब घुघुरुओ की क्या जरूरत
तेरी खनखनाती पाज़ेब से घायल है
संजीदा शायरी
जमाने की परवाह किसे
हममे गर्मी है तो हम जलते हैं
दुसरो की परवाह में
हम जलना तो न छोड़ देंगे
उसकी कारीगरी का कोई जवाब नही
खुदा ने जिसे बनाया हो बड़े इत्मिनान से,
फिर खुदा ही दिल दे बैठा उसे
तो कौन बचायेगा उस परी को इंसान से
खुदा ने जिसे बनाया हो बड़े इत्मिनान से,
फिर खुदा ही दिल दे बैठा उसे
तो कौन बचायेगा उस परी को इंसान से
क्या तुम्हें पता है तुम क्या चीज हो
खुदा की कारीगरी का तुम एक तोहफा हो
इसलिए हर कोई तुम्हारा दीवाना है
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