न बात बढ़ी न प्यार बढ़ा| hindi साहित्य hindi कविता



                                                                                                                                                                           न बात बढ़ी न प्यार बढ़ा

फिर क्यों तुझसे तकरार बढ़ा

न इश्क हुआ न प्यार हुआ

फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ

न जीत हुई न  हार हुई 

फिर भी उनसे तकरार हुई  ।।

जब ओठ खुले तो आह निकली

तेरे लिए बस चाह निकली

जब तुम नजरो से  दूर हुई 

मेरा दिल फिर तड़प गया 

न इश्क हुआ न प्यार हुआ 

फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ ||

जब तू पास मेरे रहती हैं 

ठंढी हवाए बहती हैं 

जुल्फ तेरी उड़ जाये तो 

मेरे दिल की धड़कन क्यों तेज हुआ ||




न बात बढ़ी न प्यार  बढ़ा

फिर क्इयों तुझसे तकरार बढ़ा 

इश्क  हुआ न प्यार हुआ

फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ

न जीत हुई न  हार हुई 

फिर भी उनसे तकरार हुई  ।।

जब ओठ खुले तो आह निकली

तेरे लिए बस चाह निकली

जब तुम नजरो से  दूर हुई 

मेरा दिल फिर तड़प गया 

न इश्क हुआ न प्यार हुआ 

फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ ||

जब तू पास मेरे रहती हैं 

ठंढी हवाए बहती हैं 

जुल्फ तेरी उड़ जाये तो 

मेरे दिल की धड़कन क्यों तेज हुआ ||






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