कभी-कभी कहीं कहीं
तेरी याद आ रही हैं ।।
जब तू थी मेरे पास
न लगती थी कोई खास
तेरे जाने के बाद
अब तेरी याद आ रही हैं।।
प्यार ऐसा होता हैं
मालूम हुआ मुझे तब
जब तू दूर गयी हैं मुझसे
जब आयी तेरी याद आ रही हैं ।।
अब मेरी नींद भी गयी
मेरा सकून खो रहा है
दिल मेरा अब तड़प कर रो रहा है।।
मैं जब तेरे पास आया
मेरे दिल को सकून आया
तेरी बाँहो का सहारा लेकर
चैन से मैं सोया
मेरा साथ वो पाकर खुश हो रही हैं।।
हम इश्क करते जा रहे हैं
हम इश्क करते जा रहे है
हम तुझपे मरते जा रहे है
तेरे इश्क की ऊँचाइयों पर चढ़ते जा रहे हैं ।।
मजबूरियां न कोई न कोई हमें है लालच
बस तेरे प्यार की एक हमें है चाहत
तेरे इश्क़ की गहराइयों पर डूबते जा रहे हैं।।
हम इश्क करते जा रहे है
हम इश्क करते जा रहे है।।
बस एक मन में हैं चाहत तुझसे मेरा मिलन हो
अब एक आस के खातिर हम जीते जा रहे है ||
हम इश्क करते जा रहे है
हम इश्क करते जा रहे है
प्यार कैसे है होता,अब मुझे हुआ है मालूम
जब से तुझे है देखा तेरा नाम रटते जा रहे हैं।।
हम इश्क करते जा रहे है
हम इश्क करते जा रहे हैं।।
कोई तो प्यारा होता हैं
आंख का तारा होता हैं
टिम-टिम करता रातों में
बस एक सहारा होता हैं ।।
वो आँखों मे रहता है
लेकिन कुछ न कहता है
वो मुझको देखा करता है
मैं उसको देखा करता हूँ
क्यो वो इतना प्यारा होता है।।
बस कभी न उससे मैंने कोई बात कही
मेरे दिल की बातें मेरे दिल मे ही रही
फिर भी मैं उसको ही देखा करती हूँ
वो न जाने मुझको क्यो प्यारा लगता हैं ।।
गलती से शीख
तुम एक बार हस दो

ऐ सनम जो तू हँस दे तो बहार आ जाये
मुझे तुम से फिर से प्यार हो जाये ।।
तू जो चलती हैं, तो बजती हैं तेरी पायल
मेरे दिल को वो तो करती है घायल
एक बार फिर से तू चल दे तो, वही खनकार आ जाये।।
ये हवाएं ये फिजायें क्यो लेती हैं तेरा नाम
तुझसे है क्या इन वादियों को काम
हर जगह है तेरी खुश्बू ,तू जो महके तो इत्र की खुमार आये।।
मुझे तू पसन्द हैं और तेरी हर एक अदा
मैं हुआ हूँ न जाने तुझपे क्यो फिदा
तेरी हर एक मुसकुराहट,अब मेरी मुस्कान बन जाये।।
तुम अपनी नूर सी आँखों मे गोल सा चश्मा लगाती हो
गोल चश्मा लगाकर अपनी आंखों को कोहिनूर बनाती हो
तुम्हारी आँखों की चमक, बिना चश्मे के हर तरफ फ़ैल जाती हैं
तो फिर क्यों तुम गोल सा चश्मा लगाकर हम पर बिजली गिरती हो।।
तुम्हारी आँखों की मैं क्या बात करूं
वो ऐसे चमकती है जैसे हो आसमान का तारा
तुम्हारे इन तारों को मैं सिर्फ देखा करता हूँ
उनमे मैं अपना घर ढूंढा करता हूँ
इसीलिए भी वो मुझे लगती हैं सबसे प्यारा ।।
मुस्कान को तुम्हारे मैं क्या कहूँ
जैसे दो फूल हो हर वक्त खिलते हैं
जब तुम्हारे ओठ आपस मे मिलते हैं
तो ऐसे लगता हैं दो प्रेमी आपस मे मिलते हैं
और वही तुम्हारी आँखे बंद हो जाती है
शर्म से फिर वो मुस्कुराती है
मै जब देखता हूँ ऐसे दिलकश नजारा ।।
उसने मेरी हसरतों को और बढाया हैं
उसने मेरी हसरतों को और बढाया हैं
जब उसने मेरे शिने पर अपना हाथ लगाया हैं
मैं चौक गया था उसकी इस हरकत से
जब उसने अचानक मुझे अपने गले लगाया हैं ||
मैं क्या करता यही सोच रहा था
ये क्या हो रहा हैं मेरे साथ
फिर उसने मुस्कुराकर मुझे अपने पास बुलाया हैं ||
बोली क्या हो गया,क्यों सहम गए हो तुम
क्या कभी किसी लड़की ने तुम्हे गले नहीं लगाया हैं ||
मै क्या जवाब देता,न मैं कुछ समझा न कुछ समझ आया है।।
अब मैं इसे क्या समझू, प्यार था या कुछ और
फिर उसने क्यों मुझे अपने गले लगाया हैं ||
अब क्या करूँ, यह सोच कर मैंने भी उसे गले लगाया हैं ||
उसके दो लफ्जो ने हमें फिर से मिलाया हैं ||
वो लफ्ज़ थे प्रेम के जिनको सुनकर मेरे जीवन मे एक भूचाल सा आया है।।
जिनको सुनने के खातिर मैं कब से तड़प रहा था
आज वो दिन न जाने कैसे अचानक आया है।।
न बात बढ़ी न प्यार बढ़ा
न बात बढ़ी न प्यार बढ़ा
फिर क्इयों तुझसे तकरार बढ़ा
इश्क हुआ न प्यार हुआ
फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ
न जीत हुई न हार हुई
फिर भी उनसे तकरार हुई ।।
जब ओठ खुले तो आह निकली
तेरे लिए बस चाह निकली
जब तुम नजरो से दूर हुई
मेरा दिल फिर तड़प गया
न इश्क हुआ न प्यार हुआ
फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ ||
जब तू पास मेरे रहती हैं
ठंढी हवाए बहती हैं
जुल्फ तेरी उड़ जाये तो
मेरे दिल की धड़कन क्यों तेज हुआ |
क्यों भूल गए हम गाँव को
पीपल की ठंडी छाँव को
बारिश में कागज की नाव को
मेढक की टर्र टर्र टर्र को
ठंडी की थर थर थर को
झरनों की झर झर झर को।।
सावन के उन झूलो को
सरसों के पीले फूलों को
मीठे मीठे बेरों को
खलियानों के उन ढेरों को।।
क्यों भूल गए हम गांव को।।
जुगनू के जगमग को
गांवों के उस पनघट को
सूरज की खिलती लाली को
झूलों से हिलती डाली को
क्यों भूल गए हम गांव को।।
कोयल की कू कू को
गर्मी की जलती लू को
फूलों की उस खुश्बू को
पसीने की उस बदबू को
क्यों भूल गए हम गांव को।।
दादी नानी की कहानी को
बारिस में बहते पानी को
चाँद तारों के ठंडक को
शादी के मंडप को
क्यो भूल गए हम गांव को।।
बैलों के जोड़ो को
घोड़ो के उन कोड़ो को
लहराती हुई फसलो को
मुस्कुराते हुए अपनों को
क्यों भूल गए हम गाँव को।।
तुम एक बार हस दो

ऐ सनम जो तू हँस दे तो बहार आ जाये
मुझे तुम से फिर से प्यार हो जाये ।।
तू जो चलती हैं, तो बजती हैं तेरी पायल
मेरे दिल को वो तो करती है घायल
एक बार फिर से तू चल दे तो, वही खनकार आ जाये।।
ये हवाएं ये फिजायें क्यो लेती हैं तेरा नाम
तुझसे है क्या इन वादियों को काम
हर जगह है तेरी खुश्बू ,तू जो महके तो इत्र की खुमार आये।।
मुझे तू पसन्द हैं और तेरी हर एक अदा
मैं हुआ हूँ न जाने तुझपे क्यो फिदा
तेरी हर एक मुसकुराहट,अब मेरी मुस्कान बन जाये।।
जब तुम बुलाती हो
जब तुम बुलाती हो वो दौड़ आता है
कोई और बुलाये तो वो लौट जाता है ||
न जाने तेरे बुलाने से उसे सकून मिलता हैं
तुझको देखकर उसके दिल को आराम मिलता हैं
तेरे पायल की छ्न छन न जाने
उसको क्यों इतना भाता है||
कोई और बुलाये तो वो लौट जाता है ||
मुझसे वो हर पल तेरी ही बाते करता है
तेरे ओठों के हिलने से वो हिलने लगता हैं
उसको लगता हैं तुम उसको बुलाओगी
जब तुम आती हो उसके पास तुम आओगी
तेरे प्यार में वो पागल हैं तेरा नाम जपता हैं || जो तुम बुलाती हो
प्यार ऐसे होता हैं मैंने उसके आँखों में देखा हैं
उसकी धड़कन में मैंने तेरी धड़कन देखा है
तुम मिल लो उससे एक बार
तुमको भी उससे प्यार हो जायेगा
उसके जैसा आशिक़ न तुमको मिल पायेगा
तुम्हारे प्यार के खातिर वो मर भी सकता है || जो तुम बुलाती हो
कोई तो प्यारा होता हैं
आंख का तारा होता हैं
टिम-टिम करता रातों में
बस एक सहारा होता हैं ।।
वो आँखों मे रहता है
लेकिन कुछ न कहता है
वो मुझको देखा करता है
मैं उसको देखा करता हूँ
क्यो वो इतना प्यारा होता है।।
बस कभी न उससे मैंने कोई बात कही
मेरे दिल की बातें मेरे दिल मे ही रही
फिर भी मैं उसको ही देखा करती हूँ
वो न जाने मुझको क्यो प्यारा लगता हैं ।।
गलती से शीख
उसने मेरी हसरतों को और बढाया हैं
उसने मेरी हसरतों को और बढाया हैं
जब उसने मेरे शिने पर अपना हाथ लगाया हैं
मैं चौक गया था उसकी इस हरकत से
जब उसने अचानक मुझे अपने गले लगाया हैं ||
मैं क्या करता यही सोच रहा था
ये क्या हो रहा हैं मेरे साथ
फिर उसने मुस्कुराकर मुझे अपने पास बुलाया हैं ||
बोली क्या हो गया,क्यों सहम गए हो तुम
क्या कभी किसी लड़की ने तुम्हे गले नहीं लगाया हैं ||
मै क्या जवाब देता,न मैं कुछ समझा न कुछ समझ आया है।।
अब मैं इसे क्या समझू, प्यार था या कुछ और
फिर उसने क्यों मुझे अपने गले लगाया हैं ||
अब क्या करूँ, यह सोच कर मैंने भी उसे गले लगाया हैं ||
उसके दो लफ्जो ने हमें फिर से मिलाया हैं ||
वो लफ्ज़ थे प्रेम के जिनको सुनकर मेरे जीवन मे एक भूचाल सा आया है।।
जिनको सुनने के खातिर मैं कब से तड़प रहा था
आज वो दिन न जाने कैसे अचानक आया है।।
तुम अपनी नूर सी आँखों मे गोल सा चश्मा लगाती हो
गोल चश्मा लगाकर अपनी आंखों को कोहिनूर बनाती हो
तुम्हारी आँखों की चमक, बिना चश्मे के हर तरफ फ़ैल जाती हैं
तो फिर क्यों तुम गोल सा चश्मा लगाकर हम पर बिजली गिरती हो।।
तुम्हारी आँखों की मैं क्या बात करूं
वो ऐसे चमकती है जैसे हो आसमान का तारा
तुम्हारे इन तारों को मैं सिर्फ देखा करता हूँ
उनमे मैं अपना घर ढूंढा करता हूँ
इसीलिए भी वो मुझे लगती हैं सबसे प्यारा ।।
मुस्कान को तुम्हारे मैं क्या कहूँ
जैसे दो फूल हो हर वक्त खिलते हैं
जब तुम्हारे ओठ आपस मे मिलते हैं
तो ऐसे लगता हैं दो प्रेमी आपस मे मिलते हैं
और वही तुम्हारी आँखे बंद हो जाती है
शर्म से फिर वो मुस्कुराती है
मै जब देखता हूँ ऐसे दिलकश नजारा ।।
जब तुमसे मेरी नजर मिली थी पहली बार
जब तुमसे मेरी नजर मिली थी पहली बार
तभी मुझे तुमसे हो गया था प्यार
फिर क्या था मैं तेरी तम्मना करने लगा
मैं करने लगा हर पल तेरा इंतजार | |
प्यार क्या होता हैं तब मुझे मालूम हुआ
जब तूने मुझे पहली बार छुआ
जब तूने मेरे हाथ में अपना हाथ रखा
मैं कांपने लगा जैसे मुझे आया हो बुखार | |
पर मैं क्या करूँ मेरे दिल में एक अंजान सा डर है
तू मुझसे दूर न हो जाये इस बात की मुझे फिकर हैं
इसी लिए नहीं कर पाया मैं तुझसे अपने प्यार का इजहार | |
फिर भी मैं तेरी आँखों में देखने की कोशिश करता हूँ
मौका मिलने पर तेरे आस-पास ही रहता हूँ
मैं नहीं तो तू ही सही शायद कर दे अपने प्यार का इजहार | |
न बात बढ़ी न प्यार बढ़ा
न बात बढ़ी न प्यार बढ़ा
फिर क्यों तुझसे तकरार बढ़ा
न इश्क हुआ न प्यार हुआ
फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ
न जीत हुई न हार हुई
फिर भी उनसे तकरार हुई ।।
जब ओठ खुले तो आह निकली
तेरे लिए बस चाह निकली
जब तुम नजरो से दूर हुई
मेरा दिल फिर तड़प गया
न इश्क हुआ न प्यार हुआ
फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ ||
जब तू पास मेरे रहती हैं
ठंढी हवाए बहती हैं
जुल्फ तेरी उड़ जाये तो
मेरे दिल की धड़कन क्यों तेज हुआ ||
न बात बढ़ी न प्यार बढ़ा
फिर क्इयों तुझसे तकरार बढ़ा
इश्क हुआ न प्यार हुआ
फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ
न जीत हुई न हार हुई
फिर भी उनसे तकरार हुई ।।
जब ओठ खुले तो आह निकली
तेरे लिए बस चाह निकली
जब तुम नजरो से दूर हुई
मेरा दिल फिर तड़प गया
न इश्क हुआ न प्यार हुआ
फिर क्यों तूने मेरे दिल को छुआ ||
जब तू पास मेरे रहती हैं
ठंढी हवाए बहती हैं
जुल्फ तेरी उड़ जाये तो
मेरे दिल की धड़कन क्यों तेज हुआ ||



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